अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षित गर्भपात दिवस के अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया की अध्यक्षता में जिला कार्यालय में कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, पुलिस विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला में सुरक्षित गर्भपात से संबंधित कानूनी प्रावधानों, निर्धारित प्रक्रिया तथा स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।
इस दौरान राज्य स्तर से प्राप्त पैनल चर्चा एवं मार्गदर्शन के अनुरूप समूह चर्चा भी आयोजित की गई।
डीपीएचएनओ श्रीमती वंदना बांगरे, जिला मूल्यांकन अधिकारी श्री सिद्धार्थ मेश्राम तथा डीसीएम श्री गजेंद्र पटले द्वारा सुरक्षित गर्भपात से संबंधित विषयों पर अधिकारियों को आवश्यक जानकारी प्रदान की गई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दाहिया ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य सुरक्षित गर्भपात से जुड़े प्रावधानों के संबंध में संबंधित विभागों के अधिकारियों को जागरूक करना है, ताकि जरूरतमंद महिलाओं को निर्धारित नियमों के अनुसार सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
कार्यशाला में बताया गया कि सुरक्षित गर्भपात किन परिस्थितियों में, कब और किस प्रकार कराया जा सकता है, इसके लिए निर्धारित कानूनी एवं चिकित्सकीय प्रावधानों का पालन आवश्यक है।
साथ ही यह भी बताया गया कि गर्भपात केवल निर्धारित मापदंडों को पूरा करने वाली तथा सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदित संस्था में ही कराया जाना चाहिए। अधिकारियों को सुरक्षित गर्भपात से संबंधित मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) अधिनियम, 1971 एवं इसके अंतर्गत लागू प्रावधानों की जानकारी दी गई। कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि सुरक्षित गर्भपात के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, निर्धारित चिकित्सा संस्थान तथा कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है। कार्यशाला के माध्यम से विभिन्न विभागों के अधिकारियों को सुरक्षित गर्भपात संबंधी सेवाओं, कानून एवं निर्धारित प्रक्रिया की जानकारी देकर समन्वय के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया।




