बालाघाट विकासखंड के ग्राम मगरदर्रा में कृषि विभाग एवं आत्मा परियोजना के अंतर्गत कृषि सखी सीमा एडे द्वारा संचालित बीआरसी (बिजनेस रिसोर्स सेंटर) केंद्र का 23 सितंबर को SWISSAID Organisation, पुणे एवं PRADAN संस्था की टीम ने भ्रमण किया।

इस दौरान टीम ने केंद्र की गतिविधियों, संचालन प्रक्रिया तथा किसानों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। भ्रमण के दौरान टीम के सदस्यों ने कृषि सखी सीमा एडे से बीआरसी केंद्र की स्थापना, संचालन व्यवस्था एवं केंद्र के माध्यम से संचालित विभिन्न गतिविधियों के संबंध में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने बताया कि टीम द्वारा केंद्र की स्थापना की तिथि, इसके संचालन की प्रक्रिया तथा केंद्र में तैयार किए जाने वाले उत्पादों से किसानों को होने वाले लाभ के संबंध में जानकारी ली गई। कृषि सखी सीमा एडे ने टीम को बताया कि बीआरसी केंद्र में देशी एवं पारंपरिक बीजों के संग्रहण, संरक्षण तथा सुरक्षित रख-रखाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पारंपरिक बीजों को एकत्रित कर संरक्षित किया जाता है, ताकि किसानों को आवश्यकता के समय गुणवत्तापूर्ण देशी बीज उपलब्ध हो सकें। उन्होंने बीज संरक्षण की प्रक्रिया तथा केंद्र के माध्यम से किसानों को इससे होने वाले लाभों की जानकारी भी दी।

कर्नाटक और केरल के एफपीओ प्रतिनिधियों ने भी देखा केंद्र

भ्रमण के दौरान कर्नाटक एवं केरल से आए एफपीओ के बोर्ड सदस्यों ने भी बीआरसी केंद्र की गतिविधियों एवं संचालन व्यवस्था का अवलोकन किया।

प्रतिनिधियों ने केंद्र में देशी बीजों के संग्रहण एवं संरक्षण की प्रक्रिया को समझा तथा किसानों के हित में संचालित गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राज्यों से आए एफपीओ/एफपीसी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (BODs) को बीआरसी केंद्र के सफल संचालन, देशी एवं पारंपरिक बीजों के संरक्षण तथा इनके कृषक हित में उपयोग की कार्यप्रणाली से अवगत कराना था।

इस दौरान स्थानीय स्तर पर किसानों को तकनीकी एवं आजीविका संबंधी सहयोग उपलब्ध कराने में ऐसे केंद्रों की भूमिका पर भी जानकारी साझा की गई। ग्राम मगरदर्रा का बीआरसी केंद्र स्थानीय संसाधनों एवं पारंपरिक कृषि ज्ञान को संरक्षित करने के साथ किसानों को उपयोगी कृषि सामग्री एवं जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है।

देशी बीजों के संरक्षण की यह पहल कृषि विविधता को बनाए रखने और किसानों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।