किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के तहत किसानों को फसल ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को और अधिक सरल, सुगम एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अब खरीफ एवं रबी सीजन के लिए अलग-अलग साख सीमा के स्थान पर किसानों को वर्षभर के लिए एक साख सीमा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।
साथ ही नवीन किसान क्रेडिट कार्ड की ICMIS पोर्टल पर ऑनलाइन स्वीकृति की प्रक्रिया भी लागू की जा रही है। इस नई व्यवस्था की जानकारी बैंक अधिकारियों एवं संस्था प्रबंधकों तक पहुंचाने के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, बालाघाट मुख्यालय में 29 सितंबर को एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का आयोजन कलेक्टर एवं बैंक प्रशासक कुमार सत्यम के मार्गदर्शन में किया गया।
खास बातें
- कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर रौनक चैकसे एवं रोहित ढोढ़रे ने पावर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से फसल ऋण की नवीन प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी।
- प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित शाखा प्रबंधकों एवं संस्था प्रबंधकों ने नई फसल ऋण प्रक्रिया से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे।
कार्यशाला में बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिनव सिंह बघेल, प्रबंधक लेखा पी. जोशी एवं प्रभारी प्रबंधक प्रवास मुख्यालय राजेश नगपुरे उपस्थित रहे। जिले की विभिन्न शाखाओं एवं सहकारी संस्थाओं के शाखा प्रबंधक और संस्था प्रबंधकों ने कार्यशाला में सहभागिता की।
खरीफ-रबी की अलग सीमा के स्थान पर वर्षभर एक साख सीमा
कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर रौनक चैकसे एवं रोहित ढोढ़रे ने पावर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से फसल ऋण की नवीन प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत खरीफ एवं रबी के लिए अलग-अलग साख सीमा निर्धारित करने के स्थान पर किसानों को वर्षभर के लिए एक साख सीमा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
इसके साथ ही नए किसान क्रेडिट कार्ड की स्वीकृति को ICMIS पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किए जाने की प्रक्रिया के बारे में भी प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित शाखा प्रबंधकों एवं संस्था प्रबंधकों ने नई फसल ऋण प्रक्रिया से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे। मास्टर ट्रेनरों ने सभी प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं को समझाया।
कार्यशाला में मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिनव सिंह बघेल ने कहा कि नई व्यवस्था से किसानों के लिए फसल ऋण प्रक्रिया अधिक सरल और सुगम होगी। उन्होंने शाखा एवं संस्था प्रबंधकों से कहा कि वर्षभर के लिए एक साख सीमा की नई व्यवस्था के संबंध में जिले के किसानों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।
कार्यशाला में मुख्य शाखा बालाघाट सहित लामता, किरनापुर, वारासिवनी, रामपायली, खमरिया, खैरलांजी, भानेगांव, लांजी, साडरा, कटंगी, तिरोड़ी, लालबर्रा, बैहर, बिरसा, परसवाड़ा एवं डोंगरमाली शाखाओं के शाखा प्रबंधक तथा संबंधित संस्थाओं के प्रबंधक उपस्थित रहे।


