शिमला। भारत और ताजिकिस्तान ने आलू अनुसंधान, उत्पादन, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, तथा क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाओं पर चर्चा की। इस संबंध में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला तथा ताजिकिस्तान की LCC AKOMA के प्रतिनिधियों के बीच एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। बैठक में नई दिल्ली स्थित ताजिकिस्तान गणराज्य के दूतावास के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की।

यह संवाद, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के निर्देशों के अनुरूप दोनों देशों के बीच कृषि प्रौद्योगिकियों, वैज्ञानिक ज्ञान एवं विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की दिशा में आयोजित किया गया। बैठक में संस्थान के निदेशक डॉ. बृजेश सिंह ने भारतीय दल का नेतृत्व किया।

खास बातें

  • बैठक में संस्थान के निदेशक डॉ. बृजेश सिंह ने भारतीय दल का नेतृत्व किया।
  • ताजिकिस्तान की ओर से श्री अलीशेर खोलमातोव, श्री बेखरुज इब्रागिमोव तथा श्री परविज रहीमजोड सहित नई दिल्ली स्थित ताजिकिस्तान दूतावास के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
  • डॉ. बृजेश सिंह ने बताया कि सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में एयरोपोनिक्स तकनीक के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले आलू बीज सामग्री के उत्पादन को विशेष महत्व दिया गया है।

उनके साथ संस्थान के विभिन्न प्रभागों के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आलोक कुमार, डॉ. जगदेव शर्मा, डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. सोम दत्त तथा डॉ. पिनबियांगलांग के. शामिल रहे। ताजिकिस्तान की ओर से श्री अलीशेर खोलमातोव, श्री बेखरुज इब्रागिमोव तथा श्री परविज रहीमजोड सहित नई दिल्ली स्थित ताजिकिस्तान दूतावास के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आलू उत्पादन, वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन तथा मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। संस्थान के वैज्ञानिकों ने आलू उत्पादन एवं मूल्य श्रृंखला के विभिन्न पहलुओं में भारत की उन्नत तकनीकों, अनुसंधान उपलब्धियों और संस्थान की विशेषज्ञता से ताजिकिस्तान के प्रतिनिधियों को अवगत कराया।

डॉ. बृजेश सिंह ने बताया कि सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में एयरोपोनिक्स तकनीक के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले आलू बीज सामग्री के उत्पादन को विशेष महत्व दिया गया है। एयरोपोनिक्स तकनीक गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री के तीव्र गुणन तथा बीज आलू उत्पादन प्रणाली को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ताजिकिस्तान के प्रतिनिधियों ने इस तकनीक एवं इससे संबंधित उत्पादन प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने में विशेष रुचि व्यक्त की।

बैठक में ताजिकिस्तान के प्रतिनिधियों के लिए संस्थान का एक्सपोजर विजिट आयोजित करने का प्रस्ताव भी रखा गया, ताकि वे संस्थान की उन्नत अनुसंधान सुविधाओं, एयरोपोनिक्स आधारित बीज उत्पादन, आलू फसल प्रबंधन तथा अन्य विकसित प्रौद्योगिकियों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर सकें। इसके अतिरिक्त, ताजिकिस्तान के कृषि विशेषज्ञों एवं सहयोगियों के लिए केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर भी चर्चा हुई।

ऐसे क्षमता निर्माण कार्यक्रमों से आधुनिक आलू उत्पादन एवं गुणवत्तापूर्ण बीज तकनीकों के क्षेत्र में व्यावहारिक ज्ञान और तकनीकी दक्षता विकसित करने में मदद मिलेगी।

यह संवाद भारत और ताजिकिस्तान के बीच आलू क्षेत्र में संस्थागत सहयोग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, वैज्ञानिक आदान-प्रदान, एक्सपोजर विजिट तथा क्षमता निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे दोनों देशों के बीच कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक एवं पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग को और मजबूत करने की संभावनाएं बढ़ी हैं।